सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

सबसे शक्तिशाली प्राकृतिक एंटीबायोटिक कौन सी है और यह कैसे प्रयोग की जा सकती है?By समाजसेवी वनिता कासनियां पंजाबकिचन में ऐसी चीजें मौजूद हैं जो बेहद प्रभावशाली हैं और बहुत से स्वास्थ्य से जुड़े मसलों पर कारगर हैं।1. लहसुन : लहसुन एक प्राकृतिक एंटीबायोटिक है। इसमें एंटीफंगल और एंटीवायरल तत्व मौजूद होते हैं। एक अध्ययन के अनुसार लहसुन में पाया जाने वाला सल्फर कंपाउंड एलीसिन प्राकृतिक एंटीबायोटिक के समान कार्य करते हैं। इसके अलावा, लहसुन में कई प्रकार के विटामिन, न्यूट्रिएंट्स और मिनेरल्स होते हैं जो संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होते हैं। लहसुन आंतों में होने वाले पैरासाइट्स को खत्म करता है।प्रतिदिन खाली पेट लहसुन की 2 से 3 कलियां खाई जा सकती हैं। लहसुन को विभिन्न प्रकार की डिश में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। कुछ लोग बाजार में उपलब्ध लहसुन सप्लीमेंट भी ले सकते हैं परंतु बाजार में उपलब्ध सप्लीमेंट लेने के पहले डॉक्टरी सलाह ले लेनी चाहिए।2. शहद : प्राकृतिक चिकित्सा में शहद को सबसे कारकर एंटीबायोटिक्स में से एक माना जाता है। इसमें एंटीमाइक्रोबियल, एंटी-इंफ्लेमैटोरी (सूजन कम करने वाला) और एंटीसेप्टीक गुण होते हैं। अमेरिका में हुए एक अध्ययन के अनुसार शहद में इंफेक्शन से कई स्तरों पर लड़ने की ताकत होती है। इसके इस गुण के कारण बैक्टेरिया शहद के इस्तेमाल के बाद पनप नहीं पाते।शहद हाइड्रोजन पैरोक्साइड, एसिडिटी, ओस्मोटिक इफेक्ट, हाई शुगर (ज्यादा शर्करा) और पोलिफेनोल्स होते हैं जो बैक्टेरिया सेल को खत्म करते हैं। शहद का लाभ पूरी तरह से मिले इसके लिए कच्ची और जैविक शहद इस्तेमाल में ली जानी चाहिए। शहद में समान मात्रा में दालचीनी मिलाकर दिन में एक बार खाना चाहिए। इससे इम्यून सिस्टम मजबूत होता है। इसके अलावा, चाय, फ्रूट स्मूदी और ज्यूस में शहद का इस्तेमाल किया जा सकता है।3. अजवाइन : साल 2001 में हुए एक अध्ययन के अनुसार, अजवाइन के तेल में बैक्टेरिया से लड़ने की शक्ति भरपूर मात्रा में होती है। इसमें कार्वाक्रोल, एक केमिल्कल कंपाउंड, पाया जाता है जिससे इंफेक्शन में कमी आती है और अन्य किसी पारंपरिक एंटीबायोटिक्स की तरह यह प्रभावशाली होता है।इसमें एंटीऑक्सीडेंट, एंटीसेप्टिक, एंटीवायरल, एंटीफंगल, एंटी-इंफ्लेमैटोरी, एंटीपैरासिटिक और दर्द-निवारक गुण होते हैं। पैर या नाखून में होने वाले इंफेक्शन के लिए अजवाइन के तेल की कुछ बूंदे एक टब गर्म पानी में डालकर उसमें पैर डूबाना चाहिए। पैर कुछ मिनट तक पानी में रहने देने चाहिए। यह प्रक्रिया एक हफ्ते तक रोजाना की जानी चाहिए।सायनस या अन्य श्वसन संबंधी इंफेक्शन के लिए अजवाइन तेल की कुछ बूंदे गर्म पानी में डालकर इस भाप को सूंघना चाहिए। जब तक इंफेक्शन खत्म न हो यह प्रयोग करते रहना चाहिए।4. जैतून : जैतून की पत्तियों के सत ( extract ) में विभिन्न प्रकार के बैक्टेरिया इंफेक्शन के इलाज के गुण होते हैं। जैतून की पत्तियों में काफी मात्रा में एंटीमाइक्रोबियल गुण होता है जिससे यह बैक्टेरिया और फंगी से बचाव करती हैं। इनमें एंटीइंफ्लेमैटोरी गुण भी होते है जिससे सूजन आसानी से उतर जाती है।जैतून की पत्तियों का सत आसानी से घर पर प्राप्त किया जा सकता है। पत्तियों को काटकर एक कांच के जार में डालना होता है। इस जार को वोडका से पत्तियां डूबने तक भरना है। इस जार को ढक्कन बंद करके अंधेरे में चार से पांच हफ्ते तक रखना होता है। नियत समय के बाद कपडे की मदद से छानकर द्रव्य निकाल सकते हैं। इस द्रव्य को अलग जार में स्टोर किया जा सकता है। यही जैतून की पत्तियों का सत है।जैतून की सप्लीमेंट भी कैप्सूल के रूप में बाजार में उपलब्ध हैं। परंतु इन्हें इस्तेमाल के पहले डॉक्टरी परामर्श आवश्यक है।5. हल्दी : आयुर्वेद में हल्दी को गुणों की खान समझा जाता है। हल्दी में एंटीबायोटिक गुण भरपूर मात्रा में होते हैं जिनके कारण यह बैक्टेरिया का नाश करती है और शरीर के प्राकृतिक सुरक्षा तंत्र को मजबूती प्रदान करती है। इसके साथ ही यह घाव होने पर यह बैक्टेरिया इंफेक्शन होने से भी रोकती है।एक चम्मच हल्दी और पांच से छह चम्मच हल्दी को एक एयरटाइट जार में स्टोर करके रखना चाहिए। प्रतिदिन इस मिश्रण को आधा चम्मच मात्रा में लेना चाहिए। इसके अलावा बाजार में हल्दी के सप्लीमेंट कैप्सूल के रूप में भी मिलते हैं परंतु बिना डॉक्टरी सलाह के इनका इस्तेमाल हानिकारक हो सकता है।6. अदरक : अदरक में प्राकृतिक एंटीबायोटिक गुण भरपूर होते हैं और इसके इन्हीं गुणों के कारण यह बैक्टेरिया जनित बहुत सी बिमारियों से बचाव करता है। ताजे अदरक में एक प्रकार का एंटीबायोटिक प्रभाव होता है जो खाने से पैदा होने वाले पैथोगेंस ( pathogens ), इंफेक्शन फैलाने वाले एजेंट, से हमें सुरक्षित रखता है। अदरक में श्वसन तंत्र और मसूडों पर होने वाले बैक्टेरियल हमले से बचाने के गुण भी भरपूर होते हैं।अदरक की चाय बैक्टेरियाअल इंफेक्शन से लड़ने में बहुत कारगर साबित होती है। अदरक की चाय बनाने के लिए एक इंच ताजा अदरक किस कर आधा कप पानी में करीब दस मिनिट तक उबालिए। इसे छानकर इसमें एक चम्मच और नीबू रस मिलाकर इसका सेवन करना चाहिए। इसके अलावा ताजा अदरक भी अन्य डिश में मिलाया जा सकता है। अदरक के भी कैप्सूल उपलब्ध होते हैं परंतु ताजा अदरक अधिक फायदेमंद है।7. नीम : नीम की एंटीबायोटिक के रूप में पहचान हम सभी को है। नीम त्वचा संबंधी समस्याएं पैदा करने वाले बैक्टेरिया से लड़ता है। एंटीबायोटिक से पृथक नीम का गुण यह है कि इसके हमेशा इस्तेमाल के बाद भी बैक्टेरिया पर इसका असर खत्म नहीं होता। त्वचा के अलावा नीम मुख की समस्याओं जैसे केविटी, प्लांक़, जिंजिविटिस और अन्य मसूड़ों संबंधी बीमारियों से बचाव करता है।स्किन इंफेक्शन रोकने हेतु आजकल ऐसे कोस्मेटिक्स और स्किन केअर सामान चलन में हैं जिनमें नीम सबसे खास तत्व के रूप में शामिल किया जाता है। नीम की गोलियां भी मौजूद है जिससे शरीर के अंदर सफाई की जा सके। इनके उपयोग से पहले अपने डॉक्टर से जानकारी अवश्य लें। नीम के उपयोग हम सभी जानते हैं। शरीर के भीतर और बाहर दोनों ही क्षेत्रों में नीम के फायदे अनुपम हैं।प्राकृतिक एंटीबायोटिक्स के इस्तेमाल का सबसे अधिक फायदा यह है कि इनके इस्तेमाल के कोई साइड इफेक्ट नही होते। बैक्टेरिया पर इनका असर खत्म नहीं होता जैसा एंटीबायोटिक्स के लंबे समय तक इस्तेमाल से होता है। इसके अलावा अगर आप हमेशा इस प्राकृतिक चीजों का इस्तेमाल करते हैं तो बीमारियां आपको नहीं घेर पाती हैं।~धन्यवाद~

किचन में ऐसी चीजें मौजूद हैं जो बेहद प्रभावशाली हैं और बहुत से स्वास्थ्य से जुड़े मसलों पर कारगर हैं।

1. लहसुन : लहसुन एक प्राकृतिक एंटीबायोटिक है। इसमें एंटीफंगल और एंटीवायरल तत्व मौजूद होते हैं। एक अध्ययन के अनुसार लहसुन में पाया जाने वाला सल्फर कंपाउंड एलीसिन प्राकृतिक एंटीबायोटिक के समान कार्य करते हैं। इसके अलावा, लहसुन में कई प्रकार के विटामिन, न्यूट्रिएंट्स और मिनेरल्स होते हैं जो संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होते हैं। लहसुन आंतों में होने वाले पैरासाइट्स को खत्म करता है।

प्रतिदिन खाली पेट लहसुन की 2 से 3 कलियां खाई जा सकती हैं। लहसुन को विभिन्न प्रकार की डिश में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। कुछ लोग बाजार में उपलब्ध लहसुन सप्लीमेंट भी ले सकते हैं परंतु बाजार में उपलब्ध सप्लीमेंट लेने के पहले डॉक्टरी सलाह ले लेनी चाहिए।

2. शहद : प्राकृतिक चिकित्सा में शहद को सबसे कारकर एंटीबायोटिक्स में से एक माना जाता है। इसमें एंटीमाइक्रोबियल, एंटी-इंफ्लेमैटोरी (सूजन कम करने वाला) और एंटीसेप्टीक गुण होते हैं। अमेरिका में हुए एक अध्ययन के अनुसार शहद में इंफेक्शन से कई स्तरों पर लड़ने की ताकत होती है। इसके इस गुण के कारण बैक्टेरिया शहद के इस्तेमाल के बाद पनप नहीं पाते।

शहद हाइड्रोजन पैरोक्साइड, एसिडिटी, ओस्मोटिक इफेक्ट, हाई शुगर (ज्यादा शर्करा) और पोलिफेनोल्स होते हैं जो बैक्टेरिया सेल को खत्म करते हैं। शहद का लाभ पूरी तरह से मिले इसके लिए कच्ची और जैविक शहद इस्तेमाल में ली जानी चाहिए। शहद में समान मात्रा में दालचीनी मिलाकर दिन में एक बार खाना चाहिए। इससे इम्यून सिस्टम मजबूत होता है। इसके अलावा, चाय, फ्रूट स्मूदी और ज्यूस में शहद का इस्तेमाल किया जा सकता है।

3. अजवाइन : साल 2001 में हुए एक अध्ययन के अनुसार, अजवाइन के तेल में बैक्टेरिया से लड़ने की शक्ति भरपूर मात्रा में होती है। इसमें कार्वाक्रोल, एक केमिल्कल कंपाउंड, पाया जाता है जिससे इंफेक्शन में कमी आती है और अन्य किसी पारंपरिक एंटीबायोटिक्स की तरह यह प्रभावशाली होता है।

इसमें एंटीऑक्सीडेंट, एंटीसेप्टिक, एंटीवायरल, एंटीफंगल, एंटी-इंफ्लेमैटोरी, एंटीपैरासिटिक और दर्द-निवारक गुण होते हैं। पैर या नाखून में होने वाले इंफेक्शन के लिए अजवाइन के तेल की कुछ बूंदे एक टब गर्म पानी में डालकर उसमें पैर डूबाना चाहिए। पैर कुछ मिनट तक पानी में रहने देने चाहिए। यह प्रक्रिया एक हफ्ते तक रोजाना की जानी चाहिए।

सायनस या अन्य श्वसन संबंधी इंफेक्शन के लिए अजवाइन तेल की कुछ बूंदे गर्म पानी में डालकर इस भाप को सूंघना चाहिए। जब तक इंफेक्शन खत्म न हो यह प्रयोग करते रहना चाहिए।

4. जैतून : जैतून की पत्तियों के सत ( extract ) में विभिन्न प्रकार के बैक्टेरिया इंफेक्शन के इलाज के गुण होते हैं। जैतून की पत्तियों में काफी मात्रा में एंटीमाइक्रोबियल गुण होता है जिससे यह बैक्टेरिया और फंगी से बचाव करती हैं। इनमें एंटीइंफ्लेमैटोरी गुण भी होते है जिससे सूजन आसानी से उतर जाती है।

जैतून की पत्तियों का सत आसानी से घर पर प्राप्त किया जा सकता है। पत्तियों को काटकर एक कांच के जार में डालना होता है। इस जार को वोडका से पत्तियां डूबने तक भरना है। इस जार को ढक्कन बंद करके अंधेरे में चार से पांच हफ्ते तक रखना होता है। नियत समय के बाद कपडे की मदद से छानकर द्रव्य निकाल सकते हैं। इस द्रव्य को अलग जार में स्टोर किया जा सकता है। यही जैतून की पत्तियों का सत है।

जैतून की सप्लीमेंट भी कैप्सूल के रूप में बाजार में उपलब्ध हैं। परंतु इन्हें इस्तेमाल के पहले डॉक्टरी परामर्श आवश्यक है।

5. हल्दी : आयुर्वेद में हल्दी को गुणों की खान समझा जाता है। हल्दी में एंटीबायोटिक गुण भरपूर मात्रा में होते हैं जिनके कारण यह बैक्टेरिया का नाश करती है और शरीर के प्राकृतिक सुरक्षा तंत्र को मजबूती प्रदान करती है। इसके साथ ही यह घाव होने पर यह बैक्टेरिया इंफेक्शन होने से भी रोकती है।

एक चम्मच हल्दी और पांच से छह चम्मच हल्दी को एक एयरटाइट जार में स्टोर करके रखना चाहिए। प्रतिदिन इस मिश्रण को आधा चम्मच मात्रा में लेना चाहिए। इसके अलावा बाजार में हल्दी के सप्लीमेंट कैप्सूल के रूप में भी मिलते हैं परंतु बिना डॉक्टरी सलाह के इनका इस्तेमाल हानिकारक हो सकता है।

6. अदरक : अदरक में प्राकृतिक एंटीबायोटिक गुण भरपूर होते हैं और इसके इन्हीं गुणों के कारण यह बैक्टेरिया जनित बहुत सी बिमारियों से बचाव करता है। ताजे अदरक में एक प्रकार का एंटीबायोटिक प्रभाव होता है जो खाने से पैदा होने वाले पैथोगेंस ( pathogens ), इंफेक्शन फैलाने वाले एजेंट, से हमें सुरक्षित रखता है। अदरक में श्वसन तंत्र और मसूडों पर होने वाले बैक्टेरियल हमले से बचाने के गुण भी भरपूर होते हैं।

अदरक की चाय बैक्टेरियाअल इंफेक्शन से लड़ने में बहुत कारगर साबित होती है। अदरक की चाय बनाने के लिए एक इंच ताजा अदरक किस कर आधा कप पानी में करीब दस मिनिट तक उबालिए। इसे छानकर इसमें एक चम्मच और नीबू रस मिलाकर इसका सेवन करना चाहिए। इसके अलावा ताजा अदरक भी अन्य डिश में मिलाया जा सकता है। अदरक के भी कैप्सूल उपलब्ध होते हैं परंतु ताजा अदरक अधिक फायदेमंद है।

7. नीम : नीम की एंटीबायोटिक के रूप में पहचान हम सभी को है। नीम त्वचा संबंधी समस्याएं पैदा करने वाले बैक्टेरिया से लड़ता है। एंटीबायोटिक से पृथक नीम का गुण यह है कि इसके हमेशा इस्तेमाल के बाद भी बैक्टेरिया पर इसका असर खत्म नहीं होता। त्वचा के अलावा नीम मुख की समस्याओं जैसे केविटी, प्लांक़, जिंजिविटिस और अन्य मसूड़ों संबंधी बीमारियों से बचाव करता है।

स्किन इंफेक्शन रोकने हेतु आजकल ऐसे कोस्मेटिक्स और स्किन केअर सामान चलन में हैं जिनमें नीम सबसे खास तत्व के रूप में शामिल किया जाता है। नीम की गोलियां भी मौजूद है जिससे शरीर के अंदर सफाई की जा सके। इनके उपयोग से पहले अपने डॉक्टर से जानकारी अवश्य लें। नीम के उपयोग हम सभी जानते हैं। शरीर के भीतर और बाहर दोनों ही क्षेत्रों में नीम के फायदे अनुपम हैं।


प्राकृतिक एंटीबायोटिक्स के इस्तेमाल का सबसे अधिक फायदा यह है कि इनके इस्तेमाल के कोई साइड इफेक्ट नही होते। बैक्टेरिया पर इनका असर खत्म नहीं होता जैसा एंटीबायोटिक्स के लंबे समय तक इस्तेमाल से होता है। इसके अलावा अगर आप हमेशा इस प्राकृतिक चीजों का इस्तेमाल करते हैं तो बीमारियां आपको नहीं घेर पाती हैं।

~धन्यवाद~

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

मेरे सपने 101

मेरे 101 सपने  1. मेरी हर्बल लाइफ कि टीम वर्ड में पहले न पर होनी चाहिए  2. मेरी अर्निग 5 करोड़ एक महीने कि हो जाए  3. में एक सच्चा और नेक कार्य करती राहु  4. में सच्चे मन से देश कि तन मन से सेवा करूं  5. मेरी जितनी भी जिंदगी है हर दुखी लोगो कि सेवा करूं  6. मेरे से पहले किसी कि मौत ना हो किसी का दुख सहन नहीं होता  7. मेरे देश में कोई भूखा ओर दुखी ना रहे  8. मेरा गांव और देश में कभी गरीबी ना आए  9. कोई भी मां बाप को ओलाद का दुख ना मिले  10. जितने भी दुखी मां बाप है उनको में भोजन कपड़े बिस्तर उनके चरण स्पर्श मेरे हाथ से करूं  11. कोई भी बहिन बिना भाई कि ना हो एक भाई जरूर मिले  12. बेटा बेटी बहु परिवार में मान समान मिले  13. गलत और झूठ पर बहुत गुस्सा आता है वो शांत हो  14. जब में मरू तो तो देश का तिरंगा झंडा कफ़न हो pm खुद आए श्रद्धांजलि देने  15. वर्ड में समाज सेवा में न 1, पर आयु  16. हर देश में मेरा नाम हो  17. जब भी मरू तो हर देश में मेरी खबर छपे  18. हर देश के pm मेरे से सलाह ले देश कैसे चलाए...

नीम का गोंद खाने के फायद By समाजसेवी वनिता कासनियां पंजाब नीम का गोंद खाने के फायदे जानकर हैरान रह जाएँगे क्योकि नीम के रोजाना उपयोग से कई तरह की बीमारियों से छुटकारा मिलता है। नीम का वानस्पतिक नाम है इसको अंग्रेजी में मार्गोसा ट्री (Margosa tree) नाम से जाना जाता है। नीम का प्रयोग ज्यादा तर खून को साफ करने में किया जाता है।नीम का गोंद और पत्तियां खाने के फायदेका गोंदऔषधियो के रूप में नीम का गोंद खाने के फायदे अनेकों हैं। नीम का उपयोग सदियों से होता आ रहा है नीम की पत्तियां, नीम की छाल, नीम का बीज़ आदि नीम की सभी चीजों से कोई ना कोई आयुर्वेदिक दवा बनाई जाती है और आयुर्वेद के रूप में नीम की पत्तियों आदि से किसी ना किसी रोगों का इलाज किया जाता है। आइये जानते हैं की मुख्य रूप से नीम का सेवन किसलिए किया जाता है।नीम का गोंद रक्त की गति बढ़ाता है।नीम का गोंद का रोजाना सेवन करने से शरीर में स्फूर्ति रहती है।नीम का गोंद का रोजाना सेवन करने से जल्दी कोई बीमारी नहीं होती है।नीम का गोंद खाने से सर्दी-खांसी से राहत मिलती है।नीम में मौजूद एंटीसेप्टिक गुण किसी भी प्रकार के घाव को बढ़ने नहीं देतें हैं।नीम का तेल कान के दर्द में बहुत लाभकारी होता है।नीम का तेल बालों के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है। पेट के कीड़ों को खत्म करने के लिए नीम का गोंद बहुत फायदेमंद होता है।

नीम का गोंद खाने के फायद By समाजसेवी वनिता कासनियां पंजाब नीम का गोंद खाने के फायदे जानकर हैरान रह जाएँगे क्योकि नीम के रोजाना उपयोग से कई तरह की बीमारियों से छुटकारा मिलता है। नीम का वानस्पतिक नाम है इसको अंग्रेजी में  मार्गोसा ट्री  (Margosa tree) नाम से जाना जाता है। नीम का प्रयोग ज्यादा तर खून को साफ करने में किया जाता है। नीम का गोंद और पत्तियां खाने के फायदे औषधियो के रूप में  नीम का गोंद खाने के फायदे  अनेकों हैं। नीम का उपयोग सदियों से होता आ रहा है  नीम की    पत्तियां, नीम की छाल, नीम का बीज़ आदि नीम की सभी चीजों से कोई ना कोई  आयुर्वेदिक दवा  बनाई जाती है और आयुर्वेद के रूप में नीम की पत्तियों आदि से किसी ना किसी रोगों का इलाज किया जाता है। आइये जानते हैं की मुख्य रूप से  नीम का सेवन  किसलिए किया जाता है। नीम का गोंद  रक्त  की गति  बढ़ाता है। नीम का गोंद का रोजाना सेवन करने से शरीर में  स्फूर्ति  रहती है। नीम का गोंद का रोजाना  सेवन  करने से जल्दी कोई बीमारी नहीं होती है। नीम का गोंद ख...

गर्म पानी के साथ गुड़ खाने से कौन सी खतरनाक बीमारियां दूर होती हैं? (By वनिता कासनियां पंजाब ?) गर्म पानी के साथ गुड़ खाने से यह 5 बीमारियां ठीक हो जाति हैं।एनीमिया की बीमारीजैसे कि हमे पता है कि गुड़ में आयरन की मात्रा भरपूर होती हैं तो ऐसे में जो शरीर में नए ब्लड सेल्स का निर्माण करती हैं। साथ ही इससे शरीर में खून की कमी भी नहीं होती हैं और एनीमिया की बीमारी दूर हो जाती हैं।तनाव और डिप्रेशनयदि कोई व्यक्ति में तनाव और डिप्रेशन की समस्या हैं तो उन्हें गर्म पानी के साथ गुड़ का सेवन करना चाहिए। इससे ब्रेन सेल्स मजबूत हो जाते हैं और डिप्रेशन से छुटकारा भी मिल जाता हैं।डिमेंशिया की बीमारीशायद आपको पता ना हो तो बतादें की डिमेंशिया एक मानसिक बीमारी हैं। जिसमे इंसान की याददाश्त कमजोर हो जाती हैं। बतादें की ऐसी खतरनाक बीमारी से छुटकारा पाने में लिए गर्म पानी के साथ गुड़ का सेवन करना सबसे लाभकारी साबित होता हैं।दिल की बीमारीआपको बतादें की गर्म पानी के साथ गुड़ का सेवन करने पर दिल की कार्य प्रणाली काफी ज्यादा अच्छी रहती हैं। इससे दिल संबंधित सारी बीमारी कम हो जाती हैं।इमेज स्त्रोत: google

गर्म पानी के साथ गुड़ खाने से कौन सी खतरनाक बीमारियां दूर होती हैं? (By वनिता कासनियां पंजाब ?) गर्म पानी के साथ गुड़ खाने से यह 5 बीमारियां ठीक हो जाति हैं। एनीमिया की बीमारी जैसे कि हमे पता है कि गुड़ में आयरन की मात्रा भरपूर होती हैं तो ऐसे में जो शरीर में नए ब्लड सेल्स का निर्माण करती हैं। साथ ही इससे शरीर में खून की कमी भी नहीं होती हैं और एनीमिया की बीमारी दूर हो जाती हैं। तनाव और डिप्रेशन यदि कोई व्यक्ति में तनाव और डिप्रेशन की समस्या हैं तो उन्हें गर्म पानी के साथ गुड़ का सेवन करना चाहिए। इससे ब्रेन सेल्स मजबूत हो जाते हैं और डिप्रेशन से छुटकारा भी मिल जाता हैं। डिमेंशिया की बीमारी शायद आपको पता ना हो तो बतादें की डिमेंशिया एक मानसिक बीमारी हैं। जिसमे इंसान की याददाश्त कमजोर हो जाती हैं। बतादें की ऐसी खतरनाक बीमारी से छुटकारा पाने में लिए गर्म पानी के साथ गुड़ का सेवन करना सबसे लाभकारी साबित होता हैं। दिल की बीमारी आपको बतादें की गर्म पानी के साथ गुड़ का सेवन करने पर दिल की कार्य प्रणाली काफी ज्यादा अच्छी रहती हैं। इससे दिल संबंधित सारी बीमारी कम हो जाती हैं। इमेज स्त्रोत: google