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कब्ज होने का मतलब है मलत्याग में परेशानी होना या मल का सामान्य से कम आना। 


Dr Vnita Kasnia Punjab

कब्ज एक ऐसी स्थिति होती है जिसमें व्यक्ति का पाचन तंत्र खराब हो जाता है, जिसके कारण वह जो भी खाना खाता है उसे पचा नहीं पाता है। यह आमतौर पर गंभीर नहीं है।

कब्ज आँतों के परिवर्तन की वह स्थिति है, जिसमें मल निष्कासन की मात्रा कम हो जाती है, मल कड़ा हो जाता है, उसकी गति घट जाती है या मल निष्कासन के समय अधिक बल का प्रयोग करना पड़ता है। मल त्याग की गति हर व्यक्ति में अलग-अलग होती है। लेकिन सप्ताह में 3 दिन से अधिक तक शौच ना जाना बहुत लंबा हो जाता है। ऐसे में कब्ज की स्थिति बन जाती है जिसमें मल त्याग में मुश्किल और अधिक कठिनाई होने लगती है। (और पढ़ें - कब्ज से छुटकारा पाने के लिए क्या करें)

कब्ज के लक्षण - Constipation Symptoms in Hindi

कब्ज होने के संकेत व लक्षण कुछ इस प्रकार होते हैं:

  • कब्ज में मल सख्त हो जाता है जिसकी वजह से मलत्याग में अधिक बल लगाना पड़ता है।
  • कब्ज से पीड़ित लोग प्रतिदिन मलत्याग के लिए नहीं जाते हैं जिससे इनकी परेशानी बढ़ जाती है और मलत्याग में अधिक मुश्किल होती है।
  • ऐसे लोगों की जीभ सफेद या मटमैली हो जाती है और मुंह का स्वाद भी खराब हो जाता है। साथ ही मुंह से बदबू भी आने लगती है। (और पढ़ें - मुंह का स्वाद खराब होने के कारण)
  • कब्ज के रोगियों को भूख नहीं लगती है, साथ ही मतली और उलटी की स्थिति बनी रहती है।
  • बाथरूम जाने के बाद अधूरे मल त्याग की भावना, पेट में सूजन या पेट दर्द आदि भी कब्ज के लक्षणों में आते हैं।

(और पढ़ें - पेट दर्द का घरेलू उपचार)

कब्ज के कारण - Constipation Causes in Hindi

आपके बृहदान्त्र का मुख्य काम भोजन से पानी को अवशोषित करना है। इसके बाद भोजन मल बन जाता है। फिर बृहदान्त्र की मांसपेशियां मल को मलाशय के माध्यम से बाहर निकाल देती हैं। यदि बृहदान्त्र में मल बहुत लंबे समय तक रहता है, तो वह सख्त हो जाता है और उसे पारित करना कठिन हो सकता है।

खराब आहार अक्सर कब्ज का कारण बनता है। फाइबर और पर्याप्त पानी का सेवन मल को नरम रखने में मदद करने के लिए आवश्यक है। (और पढ़ें - रोज कितना पानी पीना चाहिए)

फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ आम तौर पर पौधों से मिलते हैं। फाइबर घुलनशील और अघुलनशील रूपों में आता है। घुलनशील फाइबर पानी में घुल सकता है और पाचन तंत्र से गुजरते हुए एक नरम, जेल जैसी सामग्री बनाता है। अघुलनशील फाइबर पाचन तंत्र के माध्यम से अपनी संरचना को बनाए रखता है। (और पढ़ें - फाइबर युक्त आहार)

फाइबर के दोनों रूप मल के साथ जुड़ते हैं, इसके वजन और आकार को बढ़ाते हुए इसे नरम भी करते हैं। इससे मलाशय से गुजरना आसान हो जाता है।

तनाव, दिनचर्या में बदलाव, और ऐसी स्थितियां जो बृहदान्त्र की मांसपेशियों के संकुचन को धीमा कर देती हैं या मलत्याग की इच्छा को कम कर देती हैं, इन सब से आपको कब्ज हो सकती है। (और पढ़ें - कोलन इन्फेक्शन के लक्षण)

कब्ज के सामान्य कारणों में निम्न शामिल हैं -

कब्ज से बचाव - Prevention of Constipation in Hindi

कब्ज को रोकने के लिए निम्नलिखित उपाय किए जा सकते हैं -

  • फाइबर युक्त भरपूर भोजन करें। अच्छे स्रोत हैं फलसब्जियाँ, फलियाँ, और साबुत अनाज
  • पानी और अन्य तरल पदार्थों का खूब सेवन करें। फाइबर और पानी मलत्याग को नियमित रखने के लिए एक साथ काम करते हैं।
  • कैफीन से बचें। चाय और कॉफी निर्जलीकरण कर सकते हैं। (और पढ़ें - बच्चों में निर्जलीकरण के लक्षण)
  • दूध पीना कम कर दें। डेयरी उत्पाद से कुछ लोगों को कब्ज हो सकती है।
  • नियमित रूप से व्यायाम करें। हर दिन कम से कम 30 मिनट सक्रिय रहें।
  • जब प्रेशर बने, तो लेट्रिन जरुर जाएं, उसे रोके नहीं।

(और पढ़ें - व्यायाम करने का सही समय)

कब्ज का परीक्षण - Diagnosis of Constipation in Hindi

कब्ज का परीक्षण - Diagnosis of Constipation in Hindi

किन परीक्षणों से सख्त कब्ज़ का निदान होता है?

मेडिकल इतिहास - सख्त कब्ज़ को जांचने के लिए बहुत तरह के निदान उपलब्ध है। पहले डॉक्टर आपकी मेडिकल इतिहास लेंगे और शारीरिक परिक्षण करेंगे जिससे उन्हें यह पता चल सके कि आपको किस तरह की कब्ज़ है।

शारीरिक परिक्षण - शारीरिक परिक्षण से उन बिमारियों के बारे में पता चल सकता है जिससे कब्ज़ हुई है।

और कई तरह के परिक्षण उन लोगों के लिए उपलब्ध है जिनका किसी भी तरह के इलाज से कोई भी फर्क नहीं पड़ा। जैसे कि -

  • खून की जांच - खून की जांच से भी आपकी स्थिति के बारे में पता चल सकता है। अधिक विशेष रूप से, खून की जांच थायराइड हार्मोन और कैल्शियम की करने में मदद मिलेगी। (और पढ़ें - महिलाओं में थायराइड लक्षण)
  • पेट का एक्स-रे करना - पेट का एक्स-रे कराने से आपके पेट में मौजूद पदार्थ के बारे में पता चलता है, जितना कठोर कब्ज़ होगा उतना ज़्यादा वह एक्स-रे पर दिखाई देगा।
  • बेरियम एनीमा (Barium enema) - इससे यह पता लगाता है कि आंत्र और मलाशय ठीक तरह से काम कर रहे है या नहीं।
  • कोलोनिक्स पारगमन अध्ययन (Colonic transit marker studies) - कोलोनिक्स पारगमन अध्ययन सरल अध्ययन होते हैं। जिसमें यह पता लगा जाता है कि खाना आंत्र से बाहर आने में कितना समय ले रहा है। (और पढ़ें - कब्ज के लिए योग)
  • डेफिकोग्राफी (Defecography) - डेफिकोग्र्राफी बेरियम एनीमा परिक्षण का उपांतरण है।
  • एनोरेक्टल गतिशीलता का अध्ययन (Ano-rectal motility studies) - एनोरेक्टल गतिशीलता अध्ययन डेफिकोग्र्राफी का पूरक है, जो गूदे और मलाशय की नस और मांसपेशियों के कार्य के निर्धारण के बारे में बताता है।
  • एमआरआई डेफिकोग्राफी (Magnetic resonance imaging defecography) - मल त्यागने की गतिविधि का अध्ययन करने के लिए यह बहुत बढ़िया तरीका है।

(और पढ़ें - एमआरआई स्कैन क्या है)

कब्ज का इलाज - Constipation Treatment in Hindi

कब्ज का इलाज - Constipation Treatment in Hindi

कब्ज़ का उपचार कैसे करें?

लम्बे समय से रहने वाली कब्ज़ का इलाज अक्सर आहार और जीवन शैली में परिवर्तन करने से होता है। जिससे कि कब्ज़ ठीक हो सकें। अगर इन परिवर्तनों से मदद नहीं मिलती, तब डॉक्टर दवाइयां लेने के लिए कहेंगे।और अगर दवाइयों से भी फर्क नहीं पड़ता तो सर्जरी द्वारा कब्ज़ का इलाज किया जाता है।

  • आहार और जीवन शैली में परिवर्तन 
    डॉक्टर निम्नलिखित परिवर्तन करने की सलाह देंगे जिससे कब्ज़ में आराम मिले -
    • आहार में फाइबर की मात्रा बढ़ाना - आहार में फाइबर की मात्रा बढ़ाने से मल का वजन बढ़ जायेगा जिससे कब्ज़ की समस्या ठीक हो जाएगी। (और पढ़ें - कब्ज के लिए जूस)
    • व्यायाम करना - शारीरिक गतिविधि हमारे आंत्र की मांसपेशियों की गतिविधि को बढ़ाती है। जितना हो सके उतना रोज़ व्यायाम करने की कोशिश करें।
    • मल रोकना - खुदको मल त्यागने से न रोके। (और पढ़ें - कब्ज में क्या खाना चाहिए)
       
  • जुलाब
    बहुत तरीकों के जुलाब मौजूद है। हर जुलाब मल त्यागने को आसान बनाने के लिए अलग अलग तरीकों से काम करता है। निम्लिखित विकल्प ओवर द काउंटर मौजूद रहते हैं -
    • फाइबर युक्त जुलाब (Fiber supplement)- फाइबर मल को भारी कर देता है। (और पढ़ें - फाइबर की कमी का इलाज)
    • ऑस्मोटिक जुलाब (Osmotics) - ऑस्मोटिक जुलाब तरल पदार्थ को पेट से बाहर आने में मदद करता है।
    • स्नेहक जुलाब (Lubricant) - स्नेहक जैसे कि खनिज तेल मल को पेट से बाहर निकालने में सहायता देता है।
    • मल को नर्म करने वाले जुलाब (stool softeners) - मल को नर्म करना जैसे कि डोक्यूसेट सोडियम (कोलेस) docusate sodium (Colace) आंत्र से पानी निकालकर मल को गिला कर देता है। (और पढ़ें - नवजात शिशु में कब्ज के लक्षण)
    • एनिमा और सपोजिटरी जुलाब  (suppositories) -  सोडियम फॉस्फेट (फ्लीट) Sodium phosphate (Fleet), से मल नर्म हो जाता है। और मल त्यागने के लिए त्यार कर देता है। ग्लिसरीन से भी मल नर्म हो जाता है। (और पढ़ें - कब्ज का आयुर्वेदिक इलाज)
  • पेल्विक मांसपेशियों वाले व्यायाम करना
    डॉक्टर पेल्विक मांसपेशियों के व्यायाम करवाते हैं, जिससे हमारी पेल्विस की मांसपेशी मजबूत होती है और मल त्यागना आसान हो जाता है।
     
  • सर्जरी
    जिन लोगों का बाकी सब इलाजों से भी कब्ज़ में फर्क नहीं पड़ा। उनके पास सर्जरी द्वारा पेट का हिस्सा निकालने का विकल्प बचता है। पूरे पेट को सर्जरी द्वारा निकालने की आवश्यकता शायद ही कभी होती है। (और पढ़ें - कब्ज का होम्योपैथिक इलाज)
     
  • वैकल्पिक दवाई
    कुछ लोग दवाइयों के साथ-साथ वैकल्पिक उपचार भी करते हैं, जिससे की उनका कब्ज़ ठीक हो सके। प्रोबायोटिक जैसे कि लैक्टोबैसिलस के इस्तेमाल से भी कब्ज़ में आराम मिल सकता है। (और पढ़ें - गर्भावस्था में कब्ज का इलाज)

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